आख़िर क्षत्रिय करणी सेना से ही क्यों जुड़े?

यह एकमात्र क्षत्रिय संगठन है, जो क्षत्रिय समाज की सत्ता मे ज़्यादा से ज़्यादा भागीदारी हेतु लगातार कार्यरत है और सत्ता प्राप्त करने हेतु भारतवर्ष के सभी क्षत्रियों "चाहे वे सामान्य श्रेणी से हों या अन्य पिछड़ी जाति से" को संगठित करने की दिशा में लगातार गतिशील है । इस लोकतंत्र के राजे-रजवाड़े यानी: ग्राम पंचायत, तहसील पंचायत, ज़िला पंचायत, विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा और यहाँ स्थापित होने हेतु संगठित होना अति आवश्यक है। कहते है, जिसकी जितनी जनसंख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी। मतलब, वोट है तो सत्ता है, सत्ता है तो शक्ति है, और शक्ति है तो राष्ट्र नीति और क्षात्र धर्म की विजय सुनिश्चित है।

आइए, सभी क्षत्रिय एकजुट हों और अपने क्षात्र धर्म का निर्वहन करें।

हमारे पदचिह्न

21 राज्यों में सशक्त उपस्थिति

क्षत्रिय करणी सेना आज देशभर में अपनी अमिट पहचान स्थापित कर चुकी है। 21 राज्यों में हमारी सक्रिय उपस्थिति संगठन की एकता, अनुशासन और समर्पण का सशक्त प्रतीक है। ये पदचिह्न केवल भौगोलिक विस्तार नहीं, बल्कि समाजसेवा, संस्कारों की रक्षा और न्याय हेतु निरंतर संघर्ष की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। जय माँ करणी

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